मंगलवार, 20 अगस्त 2013

सलूनो है पूनो के संग

उतर धरती पर चला अनंग
सुंदरी रति भी उसके संग।
बहिन भैया का था त्योहार
'सलूनो' देख हो गए दंग।
 
चलो देखें चलकर कुछ गेह
हमारे लिए कौन सी देह
पड़ी है रिक्त आज परिवाद
सोचते करें तनिक संदेह।
 
कौन किसको कितना कैसे
कर रहा है अंतर से नेह।
मधुरता सच्ची है या मृषा
प्रयत कितना है कितना हेय।  
 
जोहती देखी भैया बाट
बहिन बैठी थी खोल कपाट
प्रतीक्षा कर परियात हुई
बाँध राखी कर तिलक ललाट।
 
प्रकृति तरु के कर में नवपात
लहरियाँ सर वर में जलजात।
दृगों को पलकों की प्यारी
दृष्टि राखी बाँधे अवदात।
 
पाणि-पल्लव बहिना के आज
कलाची को भैया की साज
पा रहे हैं प्यारे उपहार
सुमन राखी वाला ऋतुराज।
 
दिवस भर घूमे रती अनंग
लालि संध्या का श्यामल अंग
हुआ, बोला वसुधा से चंद
– "सलूनो है पूनो के संग।"

7 टिप्‍पणियां:

संजय अनेजा ने कहा…

वाह-वाह।

सलूनो मतलब सलोना\सलोनी टाईप या कुछ और?

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत बहुत सुंदर....

Ramakant Singh ने कहा…

प्रकृति संग राखी का अद्भुत मेल। सलूनों का अर्थ बतलाएं

Avinash Chandra ने कहा…

वाह! पूनो के संग सलूनो! ये बस आपके वश का है प्रतुल जी!

रविकर ने कहा…

जन्म दिवस दीपावली, शुभकामना अशेष |
भरे दोहरे दोहरे, सादर भाव विशेष ||

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…


@ राखी का एक अन्य नाम 'सलूनो' भी है। संजय जी, मोनिका जी, रमाकांत जी, अविनाश जी और रविकर जी आप सभी की उपस्थिति से दीपावली और छठ तक आनंदित रहा हूँ ।



बीते दिनों का एक अनुभव है सुनेंगे तो समझ आयेगा मेरा देर से उत्तर देने का कारण।



बात उन दिनों की है जब 'मिलने वाले टाइपिंग जॉब वर्क' से कमाई की शुरुआत की थी। मैं अक्सर अपने पास एक-आद पेज की टाइपिंग छोड़े रखता था। जब कोई साथी मुझसे मेरे हालचाल के बाद मेरे काम के बारे में पूछता था तो मुझे बताने को होता था "ठीक हूँ, अभी करने को कुछ काम बचा है। "

जब कार्य में व्यस्त होने का अभाव हो यानी काम-धाम ठंडा पड़ा हो तो जो इकलौता काम चल रहा हो उसे ही खींचकर दीर्घकालिक बना लेना चाहिए। :)

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ,ह्रदयस्पर्शी.आभार