गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

लल्ला का हाजमा


काऊ ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।
गैया बोली – जा ने पीयो थैली का दुद्दू।
जाई कारन होय गयो थोरो थोरो बुद्धू।

काऊ ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।
बाबा बोले – जा ने खायी मैदा की रोटी।
जाई कारन, है ना रई चार दिन सै पोटी।

काऊ ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।
दादी बोली – हर समय रखती हो गोद में।
काई बकत खेलन देओ, छोड़ देओ हौद में।

काऊ ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।
डाक्टर की राय लगी सबसे ही प्यारी।
पाँच सौ रुपैयन में पकड़ लई बीमारी।
इन्फ़ैक्शन ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।
भू-जल ने बिगाड़ो मेरो लल्ला का हाजमा।

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (03-02-2018) को "धरती का सिंगार" (चर्चा अंक-2868) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'