रविवार, 10 अप्रैल 2011

खेल का नाम है "कौन-सा नाम कौन से घर में"

स्वर के तीन भेद हैं : 
१] हृस्व : अ इ उ ऋ — चिह्नित करते हैं I से 
२] दीर्घ : आ ई ऊ ए ऐ ओ औ — चिह्नित करते हैं S से  
३] प्लुत : ओ३म — चिह्नित करते हैं ३ से 

व्यंजन :
१] क  वर्ग = क ख ग घ (गं)
२] च वर्ग = च छ ज झ (यं)
३] ट वर्ग = ट ठ ड ढ (ण) 
४] त वर्ग = त ठ द ध (न) 
५] प वर्ग = प फ ब भ (म)
इनके अलावा ..... य र ल व् श ष स ह 
...... उपर्युक्त व्यंजन हृस्व माने जाते हैं.
कुछ व्यंजन : शृ हृ म्ह आदि लघु माने जाते हैं. 
तो कुछ व्यंजन दीर्घ माने जाते हैं यथा : ह्म म्ह 
'म्ह' कभी लघु माना जाता है तो कभी गुरु. यह अपवाद है.
सभी संयुक्त व्यंजन गुरु चिह्न से अभिहित किये जायेंगे. 
संयुक्त व्यंजन : क्ष त्र ज्ञ श्र 
ध्यान रखें : संयुक्त व्यंजन के पूर्व वाला व्यंजन गुरु हो जाता है. 
जिसका आरम्भ ही संयुक्त से हो तो वह गुरु ही रहता है. यथा : प्र से प्रकाश – SSI 
[लेकिन होता यह आभासी गुरु है.]
गुरु = S = 2 मात्रा 
लघु = I = 1 मात्रा 
जैसे : बुद्धि = बुद+ धि = S + I = 3 मात्राएँ 

अब छंद ज्ञान अपनी जटिलता समाप्त करके रहेगा. 
इसलिये पाठशाला में एक खेल शुरू कर रहा हूँ :
खेल का नाम है "कौन-सा नाम कौन से घर में"

आठ घर {गण} हैं. चार शुभ घर हैं चार अशुभ घर हैं 
आपको ब्लॉग जगत के ब्लोगरों के नाम पकड़-पकड़ कर घरों में बैठाने हैं. 

म गण = मातारा = SSS =  [दिव्या श्रीवास्तव / संगीता स्वरूप ..... ] 
न गण = नसल = III =  [अमित/ अजित/ सुमन/ ....... ]
भ गण = भानस = SII =  [प्रतुल/ सञ्जय/ पंकज/ दीपक .... ]
य गण = यमाता = ISS =  [?] कोई दो नाम सुझाइए : 
स गण = सलगा = IIS =  [अविनाश/ हरदीप .....]
त गण = ताराज = SSI =  [?] कोई दो नाम सुझाइए : 
र गण = राजभा = SIS =  [हंसराज/ .....]
ज गण = जभान = ISI =  [समीर/ सतीश .....]

यदि आपके जान-पहचान के नाम किसी घर में रहने के इच्छुक हों तो अवश्य उन्हें घर दिलवाइये.




क वर्ग और च वर्ग के अनुनासिक व्यंजन सही रूप से टाइप नहीं हो पाए इसलिए गं और यं रूप लिख दिए हैं. कविताओं के माध्यम से आगामी कक्षा में छंद शिक्षा दी जायेगी. तब तक इस खेल का आनंद लीजिये.

42 टिप्‍पणियां:

ZEAL ने कहा…

रोचक खेल है , लेकिन अज्ञानता के चलते यही नहीं समझ पाये की कौन सा घर शुभ है और कौन सा अशुभ।

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

थोड़ा समझ से परे ...

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

विद्यार्थियो ! खेल के नियम सीख जाओ, नहीं तो छंद की आगामी कक्षाएँ अधर में लटक जायेंगी.
चार घर शुभ हैं :
म न भ य = मतलब मन भाये [ये घर मन को भाते हैं.]
चार घर अशुभ हैं :
त ज र स = मतलब रस तज देते हैं. [ये घर आनंद को त्याग देते हैं.]

........ कितना सरल करूँ?

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

थोड़ा मुश्किल लगा रहा है.... :(

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ अमित श्रीवास्तव जी,
आपको 'नसल' नाम के घर में प्रवेश दिया जाता है. कुछ दिन वहीं रहें.
यह 'शुभ' घर है. यह न-गण परिवार की विरासत है.
'नसल' परिवार में 'तरल नयन' नाम की कन्या रहती है. कृपया उससे अवश्य मिलें :
http://darshanprashan-pratul.blogspot.com/2010/07/blog-post_13.html

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ मोनिका जी,
आपको 'राजभा' का महल रहने को दिया जाता है. कृपया अपना चिकित्सालय वहीं ले जाएँ.
कहते हैं इसमें आत्मायें भटकती हैं. आप हिम्मती हैं इस दुष्प्रचार को मिथ्या प्रमाणित करना.
इस पर लगे अशुभता के कलंक को धो देना. इसमें कई ऎसी खासियत हैं जो आपको बाद में पता चलेंगी.
तब तक के लिये शुभ कामनाएँ.

ajit gupta ने कहा…

यगण - यमाता 122 - सुजाता, रवीजा
तगण - ताराज 221 - कैलाश, सौमेश

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ दिव्या जी,
आप अपने अज्ञान के कारण भी सही घर में रह रही हैं.
आपके घर का नाम है 'मातारा' जो सर्वगुरु [म-गण] परिवार का है.
यह शुभ घर है, इसमें रहने वाले अदभुत प्रतिभा के धनी होते हैं.
राजेन्द्र स्वर्णकार जी इस परिवार के मुखिया सदस्य हैं.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ अजित गुप्ता जी ने प्रश्नों को हल करके शुरुआत कर दी. प्रमाणित किया कि ब्लॉग-जगत में सबसे अधिक कौन सामाजिक है.
पारिवारिकता भावना के कारण ही हम अन्य नामों की स्मृति रख पाते हैं.

सञ्जय झा ने कहा…

suprabhat guruji,

path padh rahe hain.....

pranam.

सुज्ञ ने कहा…

चार घर अशुभ हैं :
त ज र स = मतलब रस तज देते हैं. [ये घर आनंद को त्याग देते हैं.]

लो कर लो बात………अशुभ घर में बैठे है हम तो…
तभी तो कहुं ज्ञान चढता क्यों नहीं

अगली टिप्पणी में ग्रहकार्य दिखाउंगा, गुरुजी!!

सुज्ञ ने कहा…

गुरूजी,

बहुत माथापच्ची की, य-गण ब्लॉगर बहुत मुश्किल से मिले……

य गण = यमाता = ISS = [बिहारी/मनीषा]

त गण = ताराज = SSI = [आलोक/राजीव/सोमेश/कैलाश/राजेश]

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

लीजिये ये तो बहुत आसान है ....

न गण = नसल = III = [अमित/ अजित/ सुमन/ ....... ]
भ गण = भानस = SII = [प्रतुल/ सञ्जय/ पंकज/ दीपक .... ]
ज गण = जभान = ISI = [समीर/ सतीश .....]

ये तीन ही सही लगे ....

ठीक है ?

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

राजेन्द्र स्वर्णकार जी इस परिवार के मुखिया सदस्य हैं....

उन्हें भी कक्षा में हाजिर किया जाये .....

हम उन से टियुशन रखना चाहते हैं ....

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

हमारा नामराशि शुभ घर में है, हम भी फ़िर खुद को शुभ घर में ही मान रहे हैं:)

मनोज कुमार ने कहा…

जानकारी अच्छी लगी।

Rahul Singh ने कहा…

उपयोगी, रोचक प्रस्‍तुति.

अमित शर्मा---Amit Sharma ने कहा…

त्रिभुवन जननायक मर्यादा पुरुषोतम अखिल ब्रह्मांड चूडामणि श्री राघवेन्द्र सरकार
के जन्मदिन की हार्दिक बधाई हो !!

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

आदरणीय प्रतुल जी !
सादर अभिवादन !

आपकी कक्षा सार्थक और रोचक है . आपके प्रयासों की जितनी भी सराहना और तारीफ़ की जाए उतनी ही कम है.

कक्षा मुझे भी पसंद आ रही है.


आपको मर्यादा पुरषोत्तम भगवान् श्री राम के जन्मदिन की कोटि -कोटि शुभकामनाएँ !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

रोचक खेल ...

तगण -- मंदीप , संदीप नाम आ सकते हैं ?

कुमार राधारमण ने कहा…

गश खाकर गिर पड़ूंगा। थोड़ा और वक्त दीजिए।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

म गण = मातारा = SSS = [दिव्या श्रीवास्तव / संगीता स्वरूप .....नित्यानंद , दीपाली ]
न गण = नसल = III = [अमित/ अजित/ सुमन/ .......अजय ,सलिल ]
भ गण = भानस = SII = [प्रतुल/ सञ्जय/ पंकज/ दीपक ... केवल राम .नूतन ]
य गण = यमाता = ISS = [?] कोई दो नाम सुझाइए : [ अनुष्का ]
स गण = सलगा = IIS = [अविनाश/ हरदीप ....शिखा वार्ष्णेय .मुदिता ]
त गण = ताराज = SSI = [?] कोई दो नाम सुझाइए : [ आशीष, स्वप्निल ]
र गण = राजभा = SIS = [हंसराज/ .....वंदना , वर्तिका , साधना , प्रतिभा सक्सेना ]
ज गण = जभान = ISI = [समीर/ सतीश ...मनोज , अनूप ]

क्या घर सही आवंटित किये हैं ?

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ सञ्जय जी,
नमस्ते.
पाठ पढ़ रहे हो या घूम-फिर रहे हो?

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ सुज्ञ जी,

जिसे 'मात्रिक छंदों' ने 'अशुभ' घर बताकर वहाँ आना-जाना मना कर दिया गया है

उसी घर में 'वार्णिक छंद' अपना उत्सव मनाते देखे जाते हैं.

आगामी कक्षा 'अशुभ' घरों में उत्सव मनाते वार्णिक छंदों की ही होगी.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ हरकीरत जी,

राजेद्र जी ने ट्यूशन फीस बढ़ा दी है केवल मातारा ग्रुप के ही लोग एडमीशन ले सकते हैं.

सलगा ग्रुप के लोग यदि राजेन्द्र जी का शागिर्द होना चाहते हैं तो 25 वर्ण के 'सुन्दरी' सवैये को लिखने का अभ्यास करें.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ सञ्जय अनेजा जी,

आपके भानस घर में बहुतेरे छंद आते जाते हैं आगामी कक्षा में जरूर मिलने आइयेगा.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ मनोज जी,

आपका नाम घर 'जभान' बेशक है फिर भी इस छंद से शुरू होने वाले छंद लाजवाब होते हैं.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ राहुल जी, आगामी कक्षा में 'भानस' से शुरू होने वाला 'मोदक' छंद खाने अवश्य आइयेगा.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

अमित जी,
आशा करता हूँ कि आपने रामजन्म के 'त्रिभंगी' छंद की परिभाषा देख ली होगी.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

विरेन्द्र जी,
नमस्ते.
आपका नाम घर 'यमाता' है.
जिसे चार बार बोलने से 'भुजंगाप्रयाता' छंद बन जाता है. सिम्पल.
इस छंद का गाना आपको याद होगा :

अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो.
हमें साथ लेलो जहाँ जा रहे हो.

मतलब
यमाता यमाता यमाता यमाता.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

संगीता जी,
आपके घर में आकर तो केवल कवितायी ही सूझती है.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

राधारमण जी,
गश खायें तो चीनी का घोल पी लीजिएगा.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

संगीता जी,
आपने सभी को उपयुक्त घर आवंटित किये हैं.
मेरी तरफ से एक नाम 'विरेन्द्र' जी का है
'यमाता' नामधारी वाले फ्लेट में यदि कोई घर खाली हो तो अवश्य दिलवाइयेगा.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

अरे! अरे! अरे! अरे! अरे!
शिखा वार्ष्णेय जी को आपने 'सलगा' घर में क्यों रखा है वे तो अनुष्का जी के साथ रहनी चाहियें.
तभी कहूँ आपने 'य'गण में केवल एक को ही क्यों जगह दी है. या फिर हो सकता है ... शिखा जी दूसरे फ्लेट में शायद घूमने आयीं हों!
कहीं कोई 'आदर्श घोटाले' का आरोप न लगा दे. जल्दी सुधार कीजिये. मेरी सरसरी नज़र से बच गयी थीं पहले.
इस तरह के आवंटन में नज़र बची नहीं कि भ्रष्टाचार के आरोप लगने शुरू हो जायेंगे.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

स्वप्निल जी को भी 'भानस' घर में ट्रांसफर किया जाये.
स्वप + नि+ल = 2 +1+1 = स्वप्निल

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

शिखा वार्ष्णेय का तो समझ आ गया ...पर स्वप्निल का

स्वप + नि +ल --- स्वप में स्व में एक मात्र ही गिनी जायेगी ? थोड़ा संशय रह गया ..फिर से पढ़ती हूँ :):)

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

संगीता स्वरूप जी,
इसे फिर से समझते हैं, 'स्वप्निल' शब्द को खंड-खंड करके प्राप्त होगा :

स^ + व^ + अ + प^ + न^ + इ + ल^ + अ

[कृपया ^ चिह्न को हलंत समझकर पढ़ें, क्योंकि हलंत का चिह्न बनाने में असमर्थ हूँ.]

क्योंकि संयुक्त वर्ण के आगे वाला गुरु हो जाता है.
'स्व' वर्ण पहले से गुरु है, फिर भी उसे एक अतिरिक्त वर्ण 'प^' उपहार में मिल रहा है.

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

गुरूजी, टाईम लगेगा अपने को सब खेला समझने में। बुकमार्क कर लिया है, छोड़ना नहीं है बस।

बेनामी ने कहा…

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