मंगलवार, 4 जनवरी 2011

सूर्यग्रहण

"तू ज़्यादा मत इतराया कर
तू मेरे पास ना आया कर."
सविता कहती — "हे धृष्ट मयंक! 
क्यों लगते हो तुम मेरे अंक. 
सारी की सारी आभा निज 
ले लेते हो कर देते रंक. 
न स्वयं किसी को बतलाते -
'क्या लिया आपने कर रातें'
मुझको अपनी बातों से तुम 
बहकाते, निज आभा पाते 
पर सच है, सच्ची नेक बात 
सम्मुख सबके आयेगी ही 
बोलो ना बोलो मेरी जय 
आगे पूजी जाऊँगी ही."

यहाँ मैंने सूर्य [सविता] को बहिन रूप में और चन्द्रमा को छोटे भाई रूप में झगड़ते दिखाया है. यहाँ बहिन सविता भाई चंदू को डाँटते हुए कहती है - तू ज़्यादा मत इतराया कर.. तू मेरे पास मत आया कर. ...

प्राथमिक छात्रों के लिये प्रश्न — 
१] जब हम अपने बड़े भाई-बहिनों से झगड़ते हैं तब हम उनकी वस्तुओं पर भी अपना अधिकार क्यों मानते हैं? 
२] चन्द्रमा पर वास्तव में किसका प्रकाश रहता है?  

5 टिप्‍पणियां:

ZEAL ने कहा…

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प्रतुल जी ,
भाई बहन का रिश्ता सबसे पवित्र होता है । खुशनसीब हैं वो सभी लोग जिनके पास भाई और बहिन हैं। मेरी इश्वर से प्रार्थना रहेगी की इस पावन रिश्ते की पवित्रता सदा बरकरार रहे और इसकी खुशबू से पूरी बगिया महकती रहे।

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Rahul Singh ने कहा…

पोस्‍ट में कविता से ज्‍यादा रोचक उसका य‍ह हिस्‍सा लगा- ''यहाँ मैंने सूर्य [सविता] को ..... मत आया कर. ...''

sanjay jha ने कहा…

suprabhat guruji

samajh bhi aya aur achha bhi laga...


pranam.

sanjay jha ने कहा…

shradhye guruji,

abhashi duniya ka parivesh bhi itna
dushit evam sankrmit ho gaya hai ke
..... ise samjhne ke liye koi spasti-
karan ki koi jaroorat nahi hogi.....

satya ... moun hota hai .....
jhoot ... ke liye tark hote hain ....

waqt itna beraham ho gaya hai ke insa koi nahi raha ....

aap apne karm me rat rahe chitragupt ke darbar me sabka lekha-jokha ho raha hai .....

sabhi bandhu bandhav ko sadar

apko hardik pranam.
9855550701 gar man kahe to

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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आभासी दुनिया का परिवेश भी इतना दूषित एवं संक्रमित हो गया है कि .....

सत्य ... मौन होता है .....
झूठ ... के लिये तर्क होते हैं ....

@ संजय जी आपकी बातों से ह्रदय द्रवित हो गया.

आपने मोबाइल नंबर दिया, उसके लिये शुक्रिया. लेकिन पहले मेरे भावों में दृढता आ जाये फिर आपसे मिलना भी करूँगा.

आपने बात का निमंत्रण देकर मुझे प्रेम-सूत्र से बाँध लिया. आभारी हूँ.

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