शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

मधुर स्मृति का बलात कर्म

मेरा मौन में निवास था लेकिन मेरे प्रिय मौन में आपका आगमन हुआ. आपको मेरा मौन भा गया. आपको मेरे मौन के प्रति लोभ हुआ (नीयत बिगड़ गई). आपने धीरे-धीरे मेरे निजी मौन पर आधिपत्य जमा लिया. मैं मौन से बाहर आ गया. इस आपदा को विस्मृत करने के लिये मैंने नाद के आवास में शरण ली. लेकिन मेरा मौन से ही मोह था, सो मैं पुनः मोह के परिवेश में जाने को उत्सुक हुआ. मोह में पुनः निवास पाने के लिये आपने मुझसे कुछ शर्तें रखीं —
पहली शर्त, आपसे मैं परिणय करूँ.
दूसरी शर्त, आपको मैं हमेशा अपने संग ही रखूँ - प्रत्येक परिस्थिति में.


यदि किसी को भाव स्पष्ट न हों तो वह इस तरह समझे : 
मैं पहले मौन के घर में रहता था. वहाँ मधुर स्मृति नामक एक बाला सहसा आने लगी. उसे मेरा मौन का अंदरूनी कक्ष बेहद पसंद आया. उसने पूरे जीवन वहीँ रहने की कल्पना कर डाली. और उसने मेरे पूरे मौन भवन में कब्ज़ा जमा लिया. मैं उसके खिलाफ कुछ न कर सका और अपने मौन भवन से बाहर ही आ गया. तब मैंने नाद नामक एक दूसरा आश्रय ढूँढा. मतलब मैं उस बाला के बलात कर्म को भुलाने के लिये रात-दिन तेज़ स्वर का संगीत सुनने लगा [फिल्मी गाने आदि]. क्योंकि मेरा स्वभाव शांत-प्रवृति का था और मेरा मोह 'मौन' के प्रति ही था सो मैंने उसे पुनः पाने के लिये मधुर स्मृति से आग्रह किया कि मुझे वह मेरा मौन लौटा दे. लेकिन मधुर स्मृति ने तब अपनी शर्तें रख दीं :
"यदि तुम दुबारा इस आवास में लौटना चाहते हो तो मेरी दो बातें माननी होंगी. 
पहली, एक तो आप मुझसे विवाह करें. दूसरी बात, आप सदा मुझे अपने साथ रखें हर हालात में. 
_____________________
........... मैं असमंजस में हूँ. क्या करूँ क्या न करूँ ?

माध्यमिक स्तर के विधार्थियों के लिये प्रश्न :
प्रश्न १ — यह गद्य की कौन-सी विधा है ?
प्रश्न २ — इस अनुच्छेद की भाषा में स्वर का तापमान क्या है ?
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प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिये प्रश्न : 
प्रश्न १ — जब आप अपने किसी प्रिय साथी को याद करते हैं तब आपके मुख पर मुस्कान आती है या गुस्सा ?
प्रश्न २ — आप किसी बुरी चीज़ को भूलने के लिये क्या-क्या करते हैं? कोई दो तरीके सुझाओ.

11 टिप्‍पणियां:

अमित शर्मा ने कहा…

उत्तर १ ----
चम्पू संस्मरण

उत्तर २ ----
030 = पिशुन स्वर
..........स्वर दबे पाँव चलता है [चुगली]
..........परिणाम ............[असंतोष]

अमित शर्मा ने कहा…

अब हम तो खुद को माध्यमिक का छातर ही मान लिए हैं :)

sanjay ने कहा…

suprabhat guruji

1. udas muskan
2. na oon baton ki charcha karna aur
na kisi se charcha sunna...

sadar pranam

सुज्ञ ने कहा…

सेवा में,
श्रीमान गुरूवर महाउदर,
दर्शन-प्राशन शाला,
ब्लोगजगत।

विषय:प्रश्न-पत्र

प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिये प्रश्न :
___________________________________
प्रश्न १ — जब आप अपने किसी प्रिय साथी को याद करते हैं तब आपके मुख पर मुस्कान आती है या गुस्सा ?

-उत्तर १ — पता नहिं चलता, गुस्से में प्रेम है या प्रेम में गुस्सा।
___________________________________

प्रश्न २ — आप किसी बुरी चीज़ को भूलने के लिये क्या-क्या करते हैं? कोई दो तरीके सुझाओ.

-उत्तर २ — तरिके…
1- बुरी चीज़ भी सुख दुख के चक्र के समान है, बीती को क्या याद करना।
2- बुरी चीज़ की प्रकृति है,पर मुझे अच्छाई ही ग्रहण करना है।
___________________________________

ZEAL ने कहा…

अच्छी कहानी । सुन्दर प्रस्तुति ।

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

.

माध्यमिक स्तर :
अनुक्रमांक - 1
आपका पहला उत्तर सही. और दूसरा उत्तर भी सही.

अनुक्रमांक २
परीक्षा ही नहीं दी. इस पाठशाला के नाटक से तटस्थ होने की कोशिश.

प्राथमिक स्तर :
अनुक्रमांक ३
आपने अपने उत्तर पत्र के द्वारा प्रेषित किये,
आपने अपने उत्तर मनोभाविक-उलझाव में ही व्यक्त किये.
प्रेममय क्रोध और क्रोधमय प्रेम. ........... अति उत्तम.
आपने बालक मन के स्तर पर पहुँचकर उत्तर दिए. सराहनीय प्रयास.
दूसरे बाल प्रश्न का उत्तर देने में आपको अपने बड़प्पन की अनुभूति बनी रही इसलिये उत्तर ने सूत्र रूप ले लिया है.

अनुक्रमांक ४ (संजय)
आपने पहले दोनों ही उत्तर एक बालक के समान दिए.
१. उदास मन.
२. न ही उन बातों की किसी से चर्चा करना और न ही किसी से चर्चा सुनना.
..... सभी को अच्छे लगने वाले उत्तर.

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प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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गद्य की विधा के नामकरण का स्पष्टीकरण :
इस गद्य में निर्माण सामग्री कविता की प्रयुक्त हुई है जबकि साँचा गद्य रूप 'संस्मरण' का है. अतः यह एक ललित संस्मरण है.
चम्पू में प्रायः पद्य और गद्य को मिश्रित करके विषयवस्तु को व्यक्त किया जाता है
अतः हम कोई नया नाम न देकर इसका तार्किक पुराना नाम ही स्वीकार लेते हैं. इसे हम अब तक शिल्प (बाह्य प्रस्तुति) की दृष्टि से चम्पू कहते थे. लेकिन अब सामग्री की दृष्टि से इसका नाम 'चम्पू' स्वीकार लेते हैं. संस्मरण की विशेषता और पहचान बनी रहे इस कारण इसका पूरा नाम 'चम्पू संस्मरण' रखना ठीक ही लगता है.
नामकरण का श्रेय : अमित शर्मा जी को.

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प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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स्वर के तापमान का स्पष्टीकरण :
क्योंकि मेरा मौन में निवास था और मेरी प्रवृत्ति शांत है. तो स्वभावतः मेरे स्वर का तापमान शांत स्वर के तापमान वाला ही है. अर्थात 020 . उसके बाद का स्वर पिशुनता का है. तापमान थोड़ा बढ़ा है. स्वभाव कुछ विकृत हुआ है. मेरा स्वर दबे पाँव है, वह मधुर स्मृति के आने से विचलित होकर कभी चुपचाप नाद की शरण में जा बैठता है, गुनगुनाता है; तो कभी फिर से अपने मौनायन को पाने के लिये प्रयासरत हो जाता है, अनुनय करता है. इस स्वर का परिणाम 'असंतोष' के द्वारा पहचाना जा सका. अन्यथा इसमें चुगली की गंध नहीं आ रही थी. जिसका कारण किसी तीसरे व्यक्ति की अनुपस्थिति है.
यदि मेरे और मधुर स्मृति के अलावा कोई अन्य तीसरा पात्र होता तो अवश्य चुगली की गंध पहचानी जा सकती थी. तब स्वर का तापमान परिणाम से नहीं कार्य से ही अनुमानित हो जाता.
स्वर को इस तरह से पहचानने की आँख विरलों पर ही होती है.

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sanjay ने कहा…

suprabhat guruji,

udas muskan (apne likha udas man)

balak se sayad kuch choot raha hai...
dekh len....


pranam.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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भूल सुधार :

प्रतिउत्तर में त्रुटि भागमभाग में हुई.

एकाधिक कार्य करने के फेर में .. पढ़ा तो मैंने 'मुस्कान' ही था लेकिन मन लिख गया.

क्षमा संजय.

मैं सोचता हूँ — उत्तर पुस्तिका की जाँच में ऎसी जल्दबाजी ने न जाने कितने ही छात्रों को निराश किया होगा. आज जान गया.

उदास मुस्कान में ....

हमें अपने प्रिय मित्र की मधुर स्मृति उदास ही कर देती है.

... इससे सरल और श्रेष्ठ उत्तर नहीं हो सकता.

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ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

भावपूर्ण, सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ