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रविवार, 26 जुलाई 2015

आनंद गंध

अहा! हो गई अब हृदय में 
दुःख चिंता शंका निर्मूल 
हृत-वितान में घूमा करती 
दिव करने वाली सित धूल 

नहीं शकुन-अपशकुन जानती 
अड़चन हो चाहे दिक् शूल। 
जब आनंद गंध फ़ैली हो 
बन्द नहीं हो सकते फूल । [पुनः लेखन]

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

आनंद गंध

अहा! हो गयी अब ह्रदय में 
दुःख चिंता शंका निर्मूल. 
हृत वितान में घूमा करती 
दिव करने वाली सित धूल. 


नहीं शकुन अपशकुन जानती 
अड़चन हो चाहे दिकशूल. 
जब आनंद गंध फैली हो 
बंद नहीं हो सकते फूल.